इ न घटनाओं से यह तो पता चलता है कि ऐसा करने वालों की दिमागी हालत ठीक नहीं होती है। सामान्य व्यक्ति ऐसा काम नहीं कर सकता है। इसमें पर्सनालिटी साइको डिसऑर्डर या मेजर साइकोलॉजिकल इश्यू भी हो सकता है। इसको एंटी सोशल पर्सनालिटी श्रेणी में रखा जाता है। इससे ग्रसित व्यक्ति किसी भी स्तर तक चला जाता है। वह कुछ पाने के लिए अपनों की भी जान ले सकता है। यह जेनेटिक और बचपन में शोषण के कारणों से भी होता है। अगर मां-पिता का शोषण हुआ है तो बच्चे में आगे चलकर यह मनोविकृति आ सकती है। ऐसे लोग सामान्य व्यवहार करते हैं लेकिन उनके अंदर उथल-पुथल चलती रहता है।
गुस्से में हर बात गलत नहीं
अगर कोई गुस्से में एकाध बार कह देता है कि ‘मैं तुम्हेें मार दूंगा’ या ‘तुम मर क्यों नहीं जाते हो’ तो यह वाकई में ऐसा करने का संकेत नहीं होता लेकिन यदि वह बार-बार कहे तो ध्यान देना जरूरी है। बचपन में कोई बच्चा जानवरों को सताता है या तितलियों के पंख तोड़ता है तो उसे तत्काल रोकें। यह आगे चलकर हिंसक प्रवृत्ति का संकेत है। ऐसे लोग की काउंसलिंग की जाए और इनकी ऊर्जा सकारात्मक कार्यों में लगवाएं तो ऐसी घटनाओं में कमी आ सकती है।
डॉ. केरसी चावडा, वरिष्ठ मनोचिकित्सक, मुंबई (पूर्व अध्यक्ष, बॉम्बे साइकाइट्रिक एसोसिएशन )
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