अच्छा खान-पान -
जैसा कि आयुर्वेद कहता है- दही, दही से बनी चीजें, छाछ, मोटा अनाज, दालें और फाइबर्स वाले फल-सब्जियां, शाकाहारी और सात्विक कहलाने वाले व्यंजन खाएं। बासी खाना, अम्लीय, तला-गला और मसालेदार खाना, मांसाहार और तामसिक कहलाने वाले आहार से परहेज करें।
अच्छी दिनचर्या -
जैसा कि हमारे सभी परंपराओं और जीवनशैली में सिफारिश की जाती है - जल्दी उठने की आदत, योग, प्राणायाम और व्यायाम, स्वच्छता से जुड़ी अच्छी आदतें और सही समय पर खाने, पीने और सोना अच्छे बैक्टीरिया की वृद्धि के लिए वातावरण तैयार करती हैं।
अच्छा व्यवहार -
जैसा कि हमारी सभ्यता और संस्कृति सिखाती है-शरीर के अंदर निवास करने वाले अरबों सूक्ष्म जीव आपके व्यवहार से भी प्रभावित होते हैं। हमारे व्यवहार को हार्मोन नियंत्रित करते हैं और हार्मोन को मस्तिष्क। मस्तिष्क हमारे ज्ञान, आदतों और व्यवहार के अनुसार कार्य करता है। ऐसे में सकारात्मक विचार और नियम-संयम वाला व्यवहार आपके साथ आपके अंदर निवास करने वाले जीवों के लिए भी अनुकूल होगा।
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