पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में दस्त एक आम समस्या है। बार-बार पलते दस्त आने को ही डायरिया कहते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार यदि दिन में 4-5 से अधिक बार ज्यादा पतले दस्त आए तो डॉक्टर को दिखाएं। डायरिया अधिक गंभीर होने पर इसका असर शरीर और मस्तिष्क के विकास पर भी पड़ता है। इसमें पानी की कमी न होने दें।
इसके कारण
दूषित खानपान जैसे बासी व दूषित खाना, गंदा पानी, वायरल इंफेक्शन, आंतों में बैक्टीरियल इंफेक्शन और कुछ बीमारियां आदि। नोरो, एडेनो और रोटा-वायरस से भी इसके होने की आशंका रहती है। गंदे हाथों से छूने, डायपर बदलते समय सफाई का ध्यान न देना अथवा बच्चों द्वारा गंदी चीजों को छूकर आंख, मुंह, नाक आदि छूने-मलने से संक्रमण हो सकता है। 90त्न डायरिया खराब हाइजीन से होता है।
क्या हैं लक्षण
पतली दस्त होना, पेट में मरोड़, दर्द और पेट फूलना, उल्टी, बुखार, वजन कम होना और इलाज न होने पर डिहाड्रेशन होता है। डिहाइड्रेशन में यूरिन कम व डार्क होना, होंठ और मुंह का सूखना, आंखों का धंसना, प्यास अधिक लगना, चिड़चिड़ा होने के साथ सुस्ती आती है। ऐसा है तो तत्काल डॉक्टर को दिखाएं।
आजमाएं ये उपाय
अगर शिशु की उम्र 6 माह से कम है तो सिफ मां का दूध पिलाएं।
छह माह से अधिक का शिशु है तो ज्यादा मात्रा में लिक्विड दें।
शिशु को दही-छाछ दे सकते हैं।
चावल-मूंग से बनी डिश दें।
हमेशा पानी उबालकर पिलाएं।
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