पुरुषों में पाए जाने वाले मुख, फेफड़े, पेट, आंत और गले के कैंसर और महिलाओं में छाती, गर्भाशय, आंत, अंडाशय और मुख कैंसर ज्यादा पाए जाते हैं। कोई भी कैंसर आनुवांशिक हो सकता है। जीन्स में दोष (म्यूटेशन) की वजह से होता है। इसी वजह से यह एक पीढ़ी से दूसरी में आता है। शरीर में 114 जीन्स कैंसर से जुड़े हैं। जीन्स म्यूटेशन खत्म नहीं किया जा सकता है। जब बच्चा गर्भ में हो तो प्री नेटल जेनेटिक टैस्टिंग से म्यूटेशन की पहचान करते हैं। कैंसर का प्रकार व कब हो सकता है, इसकी जानकारी की जा सकती है।
जीन्स का म्यूटेशन अधिकांशत : माता-पिता से मिलता है। इसलिए जिसे कैंसर हुआ है उसके बच्चों को भी जेनेटिक टैस्टिंग जरूरी है। शादी से पहले भी करानी चाहिए। हालांकि सरकारी अस्पतालों में जेनेटिक स्क्रीनिंग उपलब्ध नहीं है। नेक्सट जेनरेशन सिक्वेंसिंग तकनीक से इन जांचों की कीमत काफी कम हुई है।
नशे से बचें -
इम्यूनोथैरेपी कई तरह के कैंसर में कारगर है। जब शरीर में कैंसर के सेल्स डेवलप हो रहे होते हैं तो इम्यून सिस्टम उसे रोक सकता है। समय ये सोने व जागने एवं संतुलित खानपान, नशा न करने से कैंसर से बचा जा सकता है।
तम्बाकू-गुटखा एकसाथ चबाने से भी म्यूटेशन -
कुछ लोग प्रयोग के तौर पर तम्बाकू व गुटखा एक साथ मुंह में एक ही जगह रखकर खाने से म्यूटेशन हो सकता है। इसके अलावा सूर्य की अल्ट्रावायलेट किरणों, प्रदूषण की वजह से भी हो सकता है। कार्सिनोजेन्स तत्त्व जब शरीर के अंदर जाते हैं तो सेल्स को डैमेज करते हैं और ये सेल्स रिपेयर नहीं हो पाते हैं तो उस सेल्स में म्यूटेशन होता है जो कैंसर का कारण बनता है। शरीर में फ्री रेडिकल बनते हैं जो शरीर के सेल्स पर अटैक करते हैं। इससे भी कैंसर हो सकता है।
एक सेल में 20 हजार जींस -
एक सेल्स में में 20 हजार जीन्स होते हैं। यह जोड़े से होता है। एक मां तो दूसरा पिता से मिलता है। ये जीन्स व्यक्ति की लंबाई, आंखों व त्वचा का कलर, बालों का रंग आदि तय करते हैं। इसमें 25-50 जीन्स होती हैं जो कैंसर रोकती हैं।
सिम्टोमैटिक टैस्ट से पहचान -
जेनेटिक कैंसर की पहचान के लिए प्री सिम्टोमैटिक टैस्ट कराते हैं। स्वस्थ लोगों को प्री सिम्टोमैटिक टैस्ट करते हैं। जीन्स म्यूटेशन है या नहीं इसकी जानकारी करते हैं। म्यूटेशन मिलने पर कैंसर कब-कहां होगा की जानकारी मिलती है।
फैमिली ट्री से काउंसिलिंग -
ओवरी के कैंसर में 20-25% मरीज, बच्चों में रेटिनोग्लास्टोमा में 30%, बे्रस्ट कैंसर में 5-10%, सारकोमा, ल्यूकीमिया, कोलन कैंसर 5-10 आनुवांशिक कैंसर होता है। यंग ऐज में, दोनों बे्रस्ट में कैंसर होना या आंतों में दो जगह ट्यूमर आनुवांशिक हो सकता है। यदि 35-45 की उम्र से पहले कैंसर होता है तो आनुवांशिक हो सकता है। फैमिली ट्री से मरीज की काउंसिलिंग कर फैमिली हिस्ट्री की जानकारी लेते हैं। जेनेटिक टैस्ट करते हैं। इससे जीन्स की कोडिंग की स्टडी कर आनुवांशिक कैंसर की पहचान करते हैं।
माता-पिता से म्यूटेशन : 90% मरीजों में माता-पिता से जीन्स की म्यूटेशन मिलती है। कैंसर की शुरुआती चरण में पहचान हो जाए तो इलाज आसान है।
पहली स्टेज में इलाज आसान -
कैंसर से बचाव के लिए अर्ली डिटेक्शन स्क्रीनिंग कराना चाहिए। कैंसर जीरो या फस्र्ट स्टेज में है तो इलाज आसान है। कोलोन के लिए कोलोनोस्कोपी, ब्रेस्ट कैंसर के लिए मैमोग्राफी जांच करते हैं। सौ में 35 महिलाओं को ओवरी का कैंसर होता है। फैमिली प्लानिंग के बाद ओवरी निकलवा देनी चाहिए।
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