56 वर्षीय दिल्ली निवासी एक व्यक्ति में यह रोग आनुवांशिक कारण से हुआ। उल्टी आने, भूख न लगने, सांस लेने में दिक्कत, शरीर में सूजन व पेशाब में दिक्कत जैसे लक्षणों के कारण वह काफी समय से इस समस्या का इलाज ले रहा था लेकिन जोखिमों के कारण सर्जरी से पीछे हट जाता। फिर परेशानी बढ़ गई जिसमें गांठों का आकार और बढ़ गया। किडनी में सूजन से बुखार, तेज दर्द और अंदरुनी रक्तस्त्राव होने पर भर्ती कराया गया। दो घंटे चली सर्जरी में उसके शरीर से 7.4 किलो (सामान्यत: 150 ग्राम होता है) की किडनी निकाली। फिलहाल वह डायलिसिस पर है व ट्रांसप्लांट का इंतजार कर रहा है।
फैमिली हिस्ट्री के कारण 50 प्रतिशत आशंका
इस पॉलिसिस्टिक किडनी रोग के ज्यादातर मामले आनुवांशिक होते हैं। इस वजह से लगभग 50 फीसदी लोगों में 40 साल की उम्र के बाद इस रोग की आशंका रहती है। नॉन कैंसरस गांठ बनने की शुरुआत बिना कारण के 30 की उम्र के बाद भी हो सकती है।
किडनी निकालने की वजह सिर्फ गांठ नहीं होती...
आमतौर पर इस समस्या में गांठें निकालकर या डायलिसिस के जरिए इलाज कर दिया जाता है। किडनी निकालने की जरूरत तब तक नहीं पड़ती जब तक कि किडनी में किसी प्रकार का संक्रमण, ट्यूमर या इससे ब्लीडिंग न होने लगे।
लक्षणों को समझें...
फैमिली हिस्ट्री होने पर यदि हाई ब्लडप्रेशर, पीठ या पेट के दाएं व बाएं हिस्से में लंबे समय से दर्द, सिरदर्द, बुखार, आए दिन पेट भरा हुआ महसूस करना, पेट का आकार बढऩा और यदि यूरिन में ब्लड आता है तो नजरअंदाज बिल्कुल न करें। विशेषकर 30 वर्ष की उम्र के बाद इस तरह के लक्षणों पर ध्यान दें।
सतर्क रहें
इस बीमारी के तहत बनने वाली गांठों पर यदि शुरुआती अवस्था में ही ध्यान न दिया जाए तो इनकी संख्या बढ़़ती जाती है। साथ ही ये लिवर, फेफड़े जैसे अंगों में भी फैल सकती हैं।
एक्सपर्ट : डॉ. सचिन कथुरिया, कंसल्टेंट, यूरोलॉजिस्ट, नई दिल्ली
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