जोड़ हमारे शरीर का अहम अंग हैं। इनमें समस्या होने पर पूरा शरीर प्रभावित होता है। गठिया रोग से ज्यादातर लोग खासतौर पर उम्रदराज व महिलाएं एक उम्र के बाद ग्रस्त रहती हैं। इसके वैसे तो कई कारण हैं लेकिन हार्मोन्स में गड़बड़ी, अधिक वजन, आनुवांशिकता और धूम्रपान आदि समस्या को बढ़ाते हैं। इन दिनों बायोलॉजिकल दवाएं रोग में काफी फायदा करती हैं।
लक्षणों पर ध्यान दें
मरीज में घुटने, हाथों और कमर के जोड़ों में दर्द, सूजन, जोड़ों के आसपास स्किन पर लालिमा व गर्माहट, हाथ व पैरों में गांठें पडऩा, जोड़ों का स्थिर न रहना, उठने, बैठने या चलने में दिक्कत होना, भूख न लगना, बार-बार बुखार आना, जरूरत से ज्यादा थकान, शरीर व चेहरे पर लाल धब्बे आना व अत्यधिक कमजोरी गठिया यानी रुमैटॉयड आर्थराइटिस के प्रमुख लक्षण हैं।
प्राकृतिक प्रोटीन की तरह काम करे बायोलॉजिकल दवा
रोग से बचाव के लिए सही जीवनशैली संग वजन नियंत्रित रखना, खानपान में तली-भुनी चीजों से परहेज, दही-दूध अधिक लेना व नियमित व्यायाम जरूरी है। रोग होने की स्थिति में दर्दनिवारक, स्टेयरॉइड्स और डिजीज मॉडिफाइंग एंटी रुमैटिक ड्रग्स देते हैं। जब तक जोड़ में सूजन और लालिमा कम न हो जाए तब तक व्यायाम करने की मनाही होती है। नए इलाज के तहत आर्थराइटिस की दवा जब पूर्ण असर नहीं कर पाती तो बायोलॉजिकल दवाएं कारगर हैं। बायोटेक्नोलॉजी से तैयार ये दवाएं प्रतिरोधी तंत्र के लिए प्राकृतिक प्रोटीन की तरह काम करती हैं।
आंखों में लालिमा
ऑटोइम्युन रोग होने के कारण गठिया का प्रभाव कई बार आंखों पर भी होता है। इसे यूविआइटिस कहते हैं। इसमें मरीज की एक आंख में दर्द, लालिमा और सामने अंधकार छाने लगता है। इसलिए जोड़ों में दर्द व सूजन के साथ आंख में ऐसी दिक्कत हो तो नजरअंदाज न करें, डॉक्टरी सलाह से जांचें कराकर इलाज लें।
घरेलू उपचार
जोड़ में सूजन व लालिमा होने पर बर्फ की सिकाई उपयोगी है। रुमाल में आइस क्यूब को रख प्रभावित हिस्से पर दिन में दो बार 10-10 मिनट के लिए रखें, आराम मिलेगा। ऐसा एक हफ्ते करें। सूजन होने पर गर्म सेंक न करें, समस्या बढ़ सकती है। सूजन कम होने के बाद दवाओं और एक्सरसाइज से आराम मिलता है।
भ्रम न पालें...
जोड़ संबंधी समस्याओं में सुनने में आता है कि खट्टी चीजें या दही खाने से दिक्कत बढ़ती है, ऐसा नहीं है। गाउट की स्थिति में शरीर में यूरिक एसिड बढऩे से यह जोड़ों के बीच के तरल में जमा हो जाता है जिससे जोड़ों में सूजन व दर्द होता है। विटामिन-सी युक्त चीजें गाउट को रोकती है। अन्य जोड़ संबंधी रोगों में जोड़ों की स्फूर्ति के लिए दूध, दही आदि चीजें खाएं।
बच्चों के जोड़ों पर ध्यान दें ...
आजकल गठिया रोग के मामले बच्चों में भी मिल रहे हैं जिसे जुवेनाइल इडियोपैथिक आर्थराइटिस कहते हैं। इनमें लक्षण वयस्कों जैसे ही होते हैं। इसलिए इस उम्र में जोड़ों से जुड़ा कोई भी लक्षण जैसे दर्द व सूजन ६ हफ्ते या एक माह से ज्यादा बरकरार रहे तो तुरंत विशेषज्ञ से मिलें। विशेषकर जोड़ पर सूजन के साथ यदि लालिमा भी है तो लापरवाही न बरतें।
ऑस्टियोपोरोसिस
लंबे समय तक गठिया की शिकायत ऑस्टियोपोरोसिस की आशंका को बढ़ा देती है। इसमें हड्डियां धीरे-धीरे कमजोर हो जाती हैं। इसलिए गठिया के मरीजों की नियमित बीएमडी-डेक्सा जांच होनी चाहिए।
एक्सपर्ट : डॉ. नरेन्द्र जोशी, हड्डी रोग विशेषज्ञ, एसएमएस अस्पताल, जयपुर
एक्सपर्ट : डॉ. अखिल गोयल, रुमैटोलॉजिस्ट, जयपुर
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