Sunday, 3 November 2019

मेनोपॉज के बाद क्यों बढ़ता है बीमारियों का खतरा

मेनोपॉज के बाद हॉट फ्लशेज यानी सामान्य से अधिक पसीना भी आता है। मेनोपॉज का इलाज दवाइयां और कुछ थैरेपी से होता है। साथ ही महिला को लाइफ स्टाइल पर ध्यान देना होता है। हार्मोन रिप्लेसमेंट थैरेपी (एचआरटी) कारगर माना जाता है।

मेनोपॉज में इनका रखें ध्यान
चुस्ती एवं स्फूर्ति बनाएं रखें, तनाव वाले कार्य करने से बचें। अच्छी डाइट लें और नियमित 30 मिनट तक व्यायाम करें। व्यायाम, ध्यान, प्राणायाम जरूर करें, लाभ मिलेगा। हमेशा व्यस्त रखें, अपने रुचि के अनुसार काम करें। खाने में हरी पत्तेदार सब्जियां, सलाद व फल ज्यादा लें। प्रोटीन डाइट जैसे सोयाबीन और डेयरी प्रोडक्ट ज्यादा लें। कोई समस्या हो तो डॉक्टर को दिखाएं, कुछ भी छिपाएं नहीं। मसालेदार, सिगरेट, अल्कोहल, कॉफी चाय से परहेज करें।
40 वर्ष के बाद कराएं नियमित जांच
40 वर्ष बाद महिलाओं को कुछ जांचें नियमित करानी चाहिए। इनमें उच्च रक्तचाप, थायरॉइड, मधुमेह और हार्ट संबंधी जांचें करानी चाहिए। इसके साथ ही हड्डियों की जांच के लिए बीएमडी टेस्ट करवाएं। परिवार में गंभीर बीमारी की हिस्ट्री है तो उसकी स्क्रीनिंग कराएं। ब्रेस्ट कैंसर की जांच के लिए दो साल में पैपस्मीयर टेस्ट कराएं। डॉक्टरी सलाह पर लिपिड प्रोफाइल अन्य जांचें भी करवा सकती हैं।
एक्सपर्ट : डॉ. सुनिला खंडेलवाल, मेनोपॉज एक्सपर्ट

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