Friday, 8 November 2019

जीभ, जबड़े की तकलीफ हाे सकती है इस बीमारी का संकेत

Throat Cancer: जीभ, जबड़े, मसूड़े, गाल, मुंह, बोलने व आहार नाल के शुरुआती भाग में कैंसर होता है। जीभ के कैंसर में पहले छाला होता है, जो भरता नहीं है। गाल के कैंसर में सफेद चकत्ते, लगातार खांसी के साथ खून आना, गले में छाले, कठोर गांठें होने पर गंभीरता से लें। आइए सवाल-जवाब के जरिए जानते हैं गले के कैंसर के बारे में :-

प्र. गले का कैंसर क्या है? इसके क्या लक्षण हैं?
गले में अलग-अलग तरह के कैंसर होते हैं। जीभ, जबड़े, मसूड़े, गाल, मुंह, बोलने व आहार नाल के शुरुआती भाग में कैंसर होता है। जीभ के कैंसर में छाला होता है, जो भरता नहीं है। उसमें खून आता है, दवाइयां लेने के बाद भी ठीक नहीं होता है।

प्र. सर्जरी से पहले कौन-कौनसी जांचें की जाती है?
बायोप्सी के बाद, जांच में सी.टी. स्कैन, एमआरआई जांच कर बीमारी की स्टेज तय करके इलाज शुरू किया जाता है।

प्र. पहचान के बाद कैंसर का इलाज कैसे तय करते हैं?
पहचान होने के बाद मुंह के कैंसर में बायोप्सी में छोटा टुकड़ा लेकर मार्करस स्टडी की जाती है। इससे कैंसर के प्रकार का पता चलता है। मुंह के अंदर, गले, सांस की नली में कैंसर होने पर एंडोस्कोपी की जाती है। कैंसर के प्रकार का पता चलने पर इलाज शुरू करते हैं।

प्र. इलाज की क्या प्रक्रिया है?
कैंसर की पहचान के बाद इलाज तीन तरह से होता है। पहला तरीका सर्जरी द्वारा कैंसर वाले भाग को निकाल दिया जाता है। दूसरा रेडियोथैरेपी से और तीसरा तरीका कीमोथैरेपी से कैंसररोधी दवाएं दी जाती है। यह प्रक्रिया मरीज की केस स्टडी के बाद दी जाती है।

प्र. क्या सर्जरी के बाद कैंसर दोबारा हो सकता है?
प्राइमरी कैटेगरी में कैंसर शरीर के दूसरे भाग में आए और सेकंडरी में गले में कैंसर की वजह से गांठ, लिवर, ब्रेन और गुर्दे में कैंसर हो तो सर्जरी के बाद भी दोबारा होने की आशंका हो सकती है।

प्र. मरीज के मन में कैंसर को लेकर क्या भ्रांतियां हैं?
लोगों में भ्रांति है कि इलाज से कैंसर शरीर में फैल जाता है। मरीज को समझाने के बाद भी ठीक से उपचार नहीं कराते हैं।

प्र. क्या मरीज व परिजनों की काउंसलिंग की जाती है?
मरीज की हालत के अनुसार सर्जरी से दो सप्ताह पहले पोषक तत्त्व व दालें, सोयाबीन, सप्लीमेंट देते हैं। इसके बाद मरीज को सर्जरी से एक दिन पहले हॉस्पिटल में भर्ती किया जाता है। इलाज की प्रक्रिया के बारे में मरीज व परिजनों को समझाते हैं।

प्र. इलाज के बाद क्या सावधानियां बरतें?
धूम्रपान व शराब छोड़ दें। रेडिएशन के बाद साबुन, तेल न लगाएं। दांतों की नियमित जांच कराएं। तरल पदार्थ व दूध-दलिया खूब लें। खानपान में ताजे फल, हरी सब्जियां, टमाटर लें।

प्र. रेडियोथैरेपी कैसे की जाती है?
मरीज के ट्यूमर के हिसाब से मशीन में एनर्जी तय की जाती है। रेडियोथैरेपी सप्ताह में पांच दिन दी जाती है। सप्ताह में एक दिन जांच करते हैं। 6 से 7 सप्ताह तक थैरेपी दी जाती है।

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