स्कूल के बाद कॉलेज और फिर जॉब की टेंशन बच्चों की परेशानी को दोगुना करने का काम कर रही है। कम्पटीशन का दौर है। हर कोई एक दूसरे को पीछे छोड़कर आगे निकलना चाहता है। अभिभावक भी चाहते हैं कि उनके बच्चे अव्वल आएं, ताकि समाज में उनकी छवि और ऊंची हो। इन सब की वजह से बच्चों में मेंटल डिसऑर्डर जैसी समस्याएं पनपने लगती हैं।
मेंटल डिसऑर्डर का खतरा -
जो अभिभावक बच्चों पर अधिक पढ़ाई का जोर देते हैं, उनमें मेंटल डिसऑर्डर शुरू हो जाता है। बच्चों को खेलकूद व आराम का समय नहीं मिलता है। ध्यान केंद्रित नहीं हो पाता है। बच्चा मनोवांछित रिजल्ट नहीं ला पाता है तो अक्सर परिजनों के उपेक्षित व्यवहार से उसका मनोबल कमजोर हो जाता है। ऐसे में बच्चे गलत कदम उठा लेते हैं। बच्चे की समय रहते काउंसलिंग करानी जरूरी है। बच्चे की मनोदशा समझने के लिए अभिभावकों को भी काउंसलिंग करानी चाहिए।
from Patrika : India's Leading Hindi News Portal https://ift.tt/2WZRi80
No comments:
Post a Comment