खुजली के कारण त्वचा पर रेशेज, दाने, सूजन आदि आने के कारण एलर्जी पैदा होने की समस्या को अर्टिकेरिया कहा जाता है। ये खुजली कितने भी दिन तक हो सकती है और गंभीर अवस्था में खतरनाक भी हो सकती है।
बीमारियां कई तरह की होती है। खुजली भी एक प्रकार की बीमारी है। अर्टिकेरिया (शीतपित्त) एक ऐसी बीमारी है, जिसमें शरीर के हिस्सों जैसे चेहरे, होंठ, जीभ, गले, त्वचा, कान आदि पर खुजली होने लगती है। आमतौर पर गर्मियों के समय पसीना आने, त्वचा पर दाने होने या मच्छर काटने के कारण खुजली पैदा हो जाती है। त्वचा पर खुजली बहुत कम समय के लिए होती है और खुजाने पर यह शांत हो जाती है, लेकिन जब यह खुजली जरूरत से ज्यादा परेशान करें तो यह सामान्य नहीं रह जाती है।
अर्टिकेरिया के प्रकार -
अर्टिकेरिया कई तरह के होते हैं। तीव्र, क्रोनिक, फिजिकल, एक्वाजेनिक व जेनेटिक अर्टिकेरिया। अर्टिकेरिया में खुजली कुछ घंटों से लेकर कई माह तक हो सकती है। गर्मी, सर्दी, पसीना, पानी, बारिश, पसीने और आंसू एवं जीन के कारण एक से दूसरी पीढ़ी में संचारित हो सकता है।
अर्टिकेरिया एक प्रकार का एलर्जिक रिएक्शन है। खाद्य पदार्थों में मौजूद केमिकल्स खाने, कीड़े के काटने, सूर्य की हानिकारक किरणों आदि से शरीर में हिस्टामाइन स्रावित होता है।
इन बातों की ध्यान रखें -
अर्टिकेरिया के लक्षणों की शुरुआती तौर पर पहचान करें और खुजली करने से बचें। घबराहट होना, सांस लेने में तकलीफ होती है। सीने में खिंचाव होता है। जीभ, होंठ, चेहरे आदि पर सूजन होती है। इसके अलावा एलर्जी वाले खाद्य पदार्थों का सेवन ना करें। खुजली इतना परेशान करती है कि उसका खाना-पीना और काम करना मुश्किल हो जाता है। इस बीमारी के लक्षण दिखते ही डॉक्टर से परामर्श करें। शरीर को हाइड्रेट रखें और त्वचा का ख्याल रखें।
उपचार के लिए टिप्स -
गर्म पानी का सेवन ना करें। गुनगुने पानी का उपयोग करें।
त्वचा पर सख्त साबुन का इस्तेमाल न करें।
प्रभावित स्थान पर ठंडे पानी की पट्टी से कोल्ड कंप्रेस करें।
हल्के और ढीले कपड़े पहनें, पसीना होने पर बदल दें।
गर्मी में ज्यादा देर तक रहने से बचें।
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