जब दूध के दांत टूट रहे होते हैं तो उसी दौरान नए दांत भी आ रहे होते हैं। ऐसे में बच्चेे के दांतों की ओर जीभ चली जाती है। जीभ दांत की अपेक्षा अधिक कठोर होती है। ऐसे में वो दांत को नुकसान पहुंचा सकती है। इससे दांत का आकार बिगड़ सकता है। दांत टेढ़े-मेढ़े भी हो सकते हैं। दांत निकलने की प्रक्रिया 6-8 महीने में शुरू हो जाती है। दर्द, लार ज्यादा निकलना, बुखार व दस्त हो सकती है। बच्चों को नेचुरल टीथर दें। इसके लिए बहुत नर्म फल नहीं देना चाहिए क्योंकि वे मसूड़ों से काट लेंगे और गले में फंस सकती है।
छह माह बाद दूध के 20 दांत निकलते है -
दूध के दांत की संख्या बीस होती है जो छह माह से 3 वर्ष की उम्र तक निकलते हैं। 4 से 5 वर्ष की उम्र में गिरना शुरू होते हैं। यह प्रक्रिया 12 से 13 वर्ष की उम्र तक चलती है। अंगूठा चूसने से भी दांतों का आकार बिगड़ता है।
बचपन से रखें ध्यान -
दांतों के बनने की प्रक्रिया गर्भावस्था से ही शुरू होती है। गर्भवती महिला उस अवस्था में कैल्शियम युक्त खाद्य पदार्थों की सही मात्रा लेगी, तभी बच्चे की हड्डियां सही विकसित होंगी और अच्छे दांत निकलेंगे। दांत निकलने का प्रारंभिक समय दूध के दांत छह माह की उम्र में ही निकलने लगते हैं।
दर्द निवारक दवा का प्रयोग न करें-
बच्चों को जब दांत निकलते हैं तब उनके सामने कई समस्याएं आती हैं। मसूड़ों में दर्द और सूजन से ये चिड़चिड़े हो जाते हैं। ऐसे में कभी भी किसी भी प्रकार की दर्द निवारक दवा उसके मसूड़ों पर नहीं रगड़नी चाहिए।
ऐसे करें ब्रश -
छह वर्ष की उम्र तक बच्चे दांत साफ नहीं कर पाते। उन्हें ब्रश कैसे करना है, सिखाना चाहिए। दांत के अंदर एवं बाहरी भाग को साफ करने के लिए ब्रश को 45 अंश झुकाकर मसूड़े की लाइन पर रखकर नीचे से ऊपर की ओर साफ करना चाहिए। सोने से पूर्व दात साफ करना जरूरी है। बच्चे के ब्रश को हर दो माह में बदलना चाहिए। नर्म ब्रश का प्रयोग करना चाहिए।
नियमित चेकअप -
फ्लोराइड युक्त टूथपेस्ट प्रयोग करेंं। बच्चा टूथ ब्रश चबाता है तो ब्रशिंग के लिए दूसरा ब्रश रखना चाहिए। दूध के दांत टूटने पर नए दांतों का चैकअप कराना चाहिए। मीठा खाने से दांतों में कैविटी आ जाती है। छह माह में दांतों का चैकअप जरूरी।
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