फूड प्वाइजनिंग के लक्षण खाने के छह घंटे के भीतर आते हैं। कुछ मामलों में ये पांच से दस मिनट के भीतर भी दिखने लगते हैं। इसमें उल्टी के साथ पेट में दर्द, बार-बार दस्त आना, बार-बार यूरिन आना और जलन होना, त्वचा रूखी हो जाना, मल में खून आना, बेहोशी या चक्कर आना प्रमुख लक्षण हैं। कुछ गंभीर मामलों में पतली दस्त के साथ खून आता है। ऐसे में बिना देर किए अस्पताल पहुंचना चाहिए क्योंकि समय पर इलाज न होने से व्यक्ति के शॉक में जाने के बाद मौत भी हो सकती है।
पीलिया का भी खतरा रहता है, जिसे मेडिकल की भाषा में फिको ओरल ट्रांसमिशन कहते हैं। फूड प्वाइजनिंग होने के बाद पेट के भीतर एंजाइम्स नहीं बनते हैं। इस वजह से पाचन क्रिया रुक जाती है। आंतों की कार्यक्षमता कमजोर हो जाती है। गैस की दवा जैसे ओमेप्रोजेल, पैंटाप्रेजोल समेत अन्य तरह की दवाएं लेते हैं उन लोगों में एसिड का सीक्रेशन नहीं हो पाता है। इसके अलावा स्टोर कर रखे खाने, अधपका अंडा, मीट, कच्चा दूध, पैक्ड आइसक्रीम और बासी खाने को गरम कर खाने से बीमारी की आशंका बढ़ जाती है।
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