छोटे बच्चों को अक्सर कमजोर इम्युनिटी के कारण विभिन्न रोगों की आशंका रहती है। कई रोग ऐसे हैं जिनकी जानकारी होना बेहद जरूरी है ताकि सेहत को दुरुस्त रखा जा सके।
वैक्सीन लगवाएं -
निमोनिया फेफड़ों में होने वाला एक प्रकार का संक्रमण है। इसके कई कारण हैं, लेकिन बच्चों में एस. न्यूमोनी बैक्टीरिया (जीवाणु जन्य) रोग का मुख्य कारण है। रोग के लक्षण खांसी, थकान, कमजोरी, बुखार, छाती में दर्द, कंपकंपी, पसीना व सांस फूलना आदि हैं। बचाव के लिए न्यूमोकोकल वैक्सीन लगवाना जरूरी है।
अस्थमा में इन्हेलर जरूरी -
बच्चों में अस्थमा एलर्जी की वजह से होता है। नियमित दवा लेने से इसे रोक सकते हैं। इलाज के लिए इन्हेलर प्रयोग में लेते हैं। ये दो तरह के होते हैं प्रिवेन्टर व रिलीवर। बदलते मौसम में एलर्जी के साथ प्रीवेन्टर इन्हेलर का उपयोग करते हैं। यदि एलर्जी की तीव्रता बढ़े तो रिलीवर इन्हेलर उपयोगी है।
टायफॉइड से सुरक्षा -
बच्चे व खुद को टायफॉइड से सुरक्षित रखने के लिए कुछ उपाय कर सकते हैं-
खाने से पहले और शौचालय का इस्तेमाल करने के बाद अपने हाथों को साबुन से अच्छे से धोना चाहिए।
इस बात को सुनिश्चित करें कि घर का हर सदस्य खाने को छूने से पहले हाथों को साफ रखें।
काली खांसी से बचाव -
यह तेजी से फैलने वाला सांस का संक्रमण है जो संक्रमित व्यक्ति से करीबी संपर्क होने से फैलता है। बच्चों में यह रात में ठंड लगने जैसे लक्षणों जैसे कि छींकें आना, नाक बहना व खांसने के दौरों से शुरू होता है। इसमें विशेषकर रात में जोरदार खांसी के दौरे पड़ सकते हैं जिससे मुंह व नाक से काफी बलगम निकलता है। इससे सांस लेने में तकलीफ होती है। परट्यूसिस वैक्सीन जरूरी है।
वॉकर कितना उपयोगी ?
वॉकर के उपयोग से बच्चे को चोट लगने की आशंका रहती है। सामान्य बच्चों की तुलना में ऐसे बच्चों को भविष्य में सीढ़ियां चढ़ने और उतरने में दिक्कत महसूस हो सकती है।
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