Thursday, 24 October 2019

पहली स्टेज में लक्षण नहीं दिखने से साइलेंट किलर है पेंक्रियाज कैंसर

पेंक्रियाज (अग्नाशय) शरीर की महत्वपूर्ण ग्रंथि हैं जो लिवर और अमाशय के नीचे होती है। ये ब्लड शुगर और पाचन वाले एंजाइम्स को नियंत्रित करती है। इसमें गड़बड़ी से मस्तिष्क में ग्लूकोज का असंतुलन होता है जिससे चक्कर और कमजोरी जैसे लक्षण दिखतेे हैं। कैंसर के मरीजों में पेंक्रियाज कैंसर कम होता है और इसे साइलेंट किलर कहते हैं।

पेंक्रियाज कैंसर होने का पता सेकंड स्टेज में चलता है। इसमें पेंक्रियाज (अग्नाशय) अपनी जगह से खिसक जाता है और शरीर को दूसरे अंगों पर दबाव डालने लगता है। लिवर से जो पित्त रस निकलते हैं वे पेंक्रियाज कैंसर के बढ़ने पर रक्त में जाने लगते है जिससे पीलिया हो जाता है। इससे भी पेंक्रियाज कैंसर में लिवर फेल होने के कारण जान जा सकती है।

बढ़ती उम्र की बीमारी -
पैंक्रियाज कैंसर बढ़ती हुई उम्र की बीमारी है। ये आनुवांशिक समस्या भी है जो माता-पिता भाई-बहन से एक दूसरे को होती है। पेंक्रियाज कैंसर में इंसुलिन बनने का काम प्रभावित होता है। शुगर लेवल को बढ़ाने या घटाने वाली कोशिकाएं पेंक्रियाज में होती हैं। कैंसर कोशिकाओं के बढ़ने या फैलने का असर शुगर लेवल पर आता है।

ये जांचें जरूरी -
पेट की सोनोग्राफी से गांठ का पता करते हैं। कंट्रास्ट सीटी स्कैन, ईआरसीपी, पैट सीटी स्कैन से बीमारी का विस्तार से पता चलता है। पैट स्कैन से बीमारी शरीर के दूसरे हिस्से जैसे फेफड़े, ब्रेन, ब्लड और किडनी में फैली है तो उसकी पूरी स्थिति पता चलती है। स्कैन में एफएनएसी(पेंक्रियाज से ऊत्तक लेकर) लेकर जांच करते हैं।

ट्यूमर चार सेमी. से छोटा तो ही ऑपरेशन-
पेंक्रियाज ट्यूमर चार सेमी. से छोटा है और बड़ी रक्त वाहिकाओं से दूर है तो ऑपरेशन करते हैं। जिन रोगियों में कैंसर फैल चुका है उनमें कीमोथैरेपी से बीमारी को कम करने के बाद ऑपरेशन करते हैं। ऑपरेशन से पहले रेसपिरेटरी मेडिसिन देते हैं। शरीर में प्रोटीन का स्तर संतुलित रखना जरूरी है वर्ना ऑपरेशन के इच्छित नतीजे नहीं आते ।

लक्षणों को समय रहते पहचानें -
पेंक्रियाज कैंसर के लक्षण सामान्य होते हैं। इसमें जी-घबराना, उल्टी, पीलिया, अपच, अचानक वजन कम होना, भूख न लगना, नाक से पानी आना, उल्टी होना, शरीर में ग्लूकोज लेवल कम या अधिक होने से चक्कर या थकान रहना। दिमाग में ग्लूकोज की पर्याप्त मात्रा न पहुंचने पर व्यक्ति बेहोश होने के साथ कोमा में भी जा सकता है।

लाइफस्टाइल सुधार से बचाव संभव -
पेंक्रियाज कैंसर से बचाव के लिए लाइफ स्टाइल का बेहतर होना जरूरी है। इसमें खानपान के साथ नियमित एक्सरसाइज करना जरूरी है। खानपान में फल, हरी सब्जियों के साथ दाल, सूप आदि अधिक मात्रा में लेने चाहिएं। डायबिटीज के रोगियों को खास खयाल रखना चाहिए और नियमित जांच कराते रहना चाहिए। रेड मीट खाने से परहेज करना चाहिए। इसमें फैट अच्छी क्वालिटी का नहीं होता है। इसकी जगह मछली और अंडा अधिक फायदेमंद माना जाता है।

पेंक्रियाज इंफेक्शन भी खतरनाक -
शराब-सिगरेट पीने, तंबाकू, पान-मसाला खाने से बीमारी बढ़ सकती है। डायबीटिज और पेंक्रियाज इंफेक्शन जिसे पेन्क्रियाटाइटिस कहते हैं से भी बीमारी हो सकती है। कैंसर बहुत अधिक फैल गया है तो ऑपरेशन से भी रोगी के जीवन को बढ़ाना काफी मुश्किल होता है।

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