छोटे सदाबहार पेड़ से प्राप्त दालचीनी बेहद खुशबूदार होती है। इसकी छाल को खासतौर पर मसाले के रूप में प्रयोग में लेते हैं। साथ ही इससे निकला तेल भी कई तरह से उपयोगी है। जानते हैं इसके प्रयोग के बारे में-
पोषक तत्त्व : थाइमीन, फॉस्फोरस, प्रोटीन, सोडियम, विटामिन, कैल्शियम, मैंग्नीज, पोटेशियम, निआसीन, काबोहाइडे्रट आदि तत्त्वों से युक्त दालचीनी स्वाद में थोड़ी मीठी और तीखी होती है। स्वाद बढ़ाने के अलावा यह वात कफ से जुड़े रोगों को दूर करने में उपयोगी है। यह कई औषधियां बनाने में भी इस्तेमाल होती है।
ध्यान रखें : दालचीनी चूर्ण 4-5 ग्राम व तेल की 3-4 बूंद की मात्रा से अधिक न लें। गर्म तासीर होने से अधिक लेने पर लिवर फेल होने, गर्भाशय में सिकुड़ने, त्वचा पर व पेट में जलन हो सकती है।
फायदे -
उल्टी, हृदय रोग, जोड़ों में दर्द, बेचैनी, सर्दी-जुकाम जैसे मौसमी रोग, अपच और महिला संबंधी रोगों के लिए इसे खासतौर पर प्रयोग में लेते हैं। वजन कम करने के अलावा यह डायबिटीज में ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने का काम करती है। इसमें कैंसर विरोधी गुण पाए जाते हैं जिस कारण कई प्रकार के कैंसर के इलाज में इसे प्रयोग करते हैं।
इस्तेमाल - दालचीनी को अंदरुनी और बाहरी दोनों रूपों में प्रयोग में लिया जा सकता है। अंदरुनी फायदे के लिए इसके चूर्ण को अकेले या शहद, दूध और अन्य जड़ी बूटियों के साथ प्रयोग में लेते हैं। वहीं बाहरी रूप से इसका तेल उपयोगी है। जिससे घाव, दर्द व सूजन में राहत मिलती है।
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