ऐसे बच्चे जिनमें रिकेट्स, उनके हड्डियों के अलाइनमेंट में गड़बड़ी, सेरेब्रल पॉल्सी के मरीज बच्चों में यह दिक्कत ज्यादा होती है। ऐसे बच्चों की हड्डियां, नसें व मांसपेशियां कमजोर होती हैं। इसलिए उन्हें सही मुद्रा में बैठने में दिक्कत होती है। जिन बच्चों में पोषण की कमी से सही तरीके से शारीरिक विकास नहीं होता है उनमें भी यह दिक्कत होती है।
आगे चलकर बढ़ती है परेशानी
इस मुद्रा में बैठने से बच्चों की मांसपेशियों व हड्डियों का विकास बाधित होता है। पैरों की मांसपेशियों में एक प्रकार की कठोरता आ जाती है। इस आदत से जोड़ों पर गलत असर पड़ता है। चलने व दौडऩे में दिक्कत आती है। पैरों में अकडऩ हो जाती है। अधिक दबाव से कूल्हों से संबंधित समस्याएं होती हैं।
ये पांच बदलाव करें
1- तैराकी, साइक्लिंग व अन्य आउटडोर गेम्स में भाग लेने को प्रोत्साहित करें।
2- बच्चा इस पोजिशन में बैठे तो उसे टोकें। दिक्कतों के बारे में बताएं।
3- बच्चे को आलती-पालती मारकर बैठने के फायदों के बारे में बताएं।
4- बच्चे की पीठ, जोड़ों की अच्छे से मालिश करें, इससे मजबूती आएगी।
5- सामान्य मुद्रा में बैठने से दिक्कत है तो स्टूल, कुर्सी के सहारे बैठाएं। दिक्कत होने पर चिकित्सक से परामर्श लें।
एक्सपर्ट : डॉ. अशोक गुप्ता, वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ, जेके लोन हॉस्पिटल, जयपुर
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