घर में नन्हे मेहमान की सूचना मिलते ही पूरा परिवार उसके स्वागत की तैयारियों में जुट जाता है। शिशु के आगमन के साथ मां को भी विशेष देखभाल की जरूरत होती है। कुछ बातों को ध्यान में रखें-
पहले से तैयारी : गर्भावस्था के दौरान अक्सर महिलाओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है। ऐसे में उन्हें ठंड से बचना चाहिए। सुबह-शाम शरीर को मोटे कपड़ों से ढककर रखें। ठंड से बचने के लिए पैरों में मोजे पहनकर रहें। अस्पताल जाने से पहले अपना बैग पहले से तैयार कर लें। उसमें स्कार्फ के अलावा कंबल और अन्य ऊनी कपड़े जरूर रखें। कोशिश करें कि शाम की ठंडी हवा के संपर्क में ज्यादा न आएं। वर्ना दिक्कत होगी।
स्पेशल केयर -
शिशु के घर लौटने के बाद यह ध्यान रखें कि जिस कमरे में वह रहेगा वहां का तापमान न ज्यादा गर्म और न ही ज्यादा ठंडा हो। लेकिन इस दौरान दरवाजे व खिड़कियां खुली रखें। क्योंकि यह वातावरण में मौजूद ऑक्सीजन व नमी को सोख लेता है। जिससे त्वचा रूखी हो जाती है। एक सप्ताह तक सिर्फ गीले कपड़े से उसके शरीर को पोछें।
प्रसव के बाद : प्रसव के बाद शुरू के 5-6 दिन शिशु की देखभाल अस्पताल वाले करते हैं। इस दौरान शिशु का शरीर गीला होता है जिसे साफ कपड़े से पोंछकर रेडिएंट वार्मर में रखते हैं क्योंकि गर्भ के बाहर का तापमान ठंडा होता है। फिर गर्म कपड़े में लपेट देते हैं। ध्यान रखें कि प्रसव के बाद पहले दिन शिशु को नहलाना नहीं चाहिए वर्ना उसका शरीर नीला पड़ सकता है।
खुद का ध्यान रखें-
शिशु की देखभाल के चक्कर में महिला खुद पर ध्यान ही नहीं देती। ऐसा न करें। सर्दी से बचकर रहें वर्ना असर नवजात पर हो सकता है। रोज गुनगुने पानी से नहाने के बाद शरीर पर तेल मालिश करें ताकि मांसपेशियों में रक्तसंचार बेहतर हो। नॉर्मल डिलीवरी नहीं हुई है तो डॉक्टरी सलाह पर मालिश शुरू करें।
हैल्दी हो डाइट-
जितना हो सके पालक, मेथी, गाजर, चुकंदर जैसी हरी सब्जियां खाएं। इनमें विटामिंस, प्रोटीन, एंटीऑक्सीडेंट्स तत्त्व होते हैं जो बे्रस्टफीडिंग के दौरान महिलाओं के लिए फायदेमंद हैं। इम्युनिटी बढ़ाने के लिए बादाम, पिस्ता, अखरोट, किशमिश, अंजीर खाएं। मौसमी फल व सब्जियां भी खाएं।
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