कुछ बच्चों में जन्म या उम्र बढ़ने के दौरान हाथ और पैर को कोहनी या घुटने से मोड़ने की क्षमता कम होती है। कमजोर मसल्स से खानेपीने, उठने-बैठने या फिर शरीर के विभिन्न जोड़ से बच्चे का नियंत्रण खोने जैसे लक्षणों से समस्या को आसानी से पहचान सकते हैं। मेडिकली इसे हाइपोटोनिया या फ्लॉपी बेबी सिंड्रोम भी कहते हैं।
प्रमुख कारण -
डाउन सिंड्रोम जैसे आनुवांशिक रोग के अलावा नर्वस या कोई मस्कुलर समस्या की वजह से भी बीमारी हो सकती है। दिमागी रोग जैसे सेरेब्रल पाल्सी, जन्म के समय दिमाग में ऑक्सीजन की कमी आदि भी अहम हैं।
बचाव-
जन्म के बाद कुछ समय तक लक्षणों की पहचान नहीं हो पाती। लेकिन उसकी शारीरिक व मानसिक गतिविधियां सामान्य से अलग महसूस हों या शरीर पर उसका नियंत्रण न दिखे तो डॉक्टरी सलाह लें। ऐसे में वह गोद में आते ही फिसलने लगता है। ब्लड टैस्ट, एमआरआई और सीटी स्कैन जैसी जांचें करते हैं।
ऐसे होता इलाज-
शिशु में किसी भी प्रकार की शारीरिक, मानसिक या भावनात्मक गड़बड़ी देखने के बाद ही इलाज तय करते हैं। साइकोथैरेपी, फिजियोथैरेपी या स्पीच थैरेपी के अलावा रोग की वजह मेनिनजाइटिस, इंसेफेलाइटिस या अन्य संक्रमण है तो एंटीबायोटिक दवा देते हैं।
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