हर महिला के लिए प्रेग्नेंसी बेहद अहम होती है। कॅरियर बनाने और जिंदगी में कुछ करने के उद्देश्य के कारण इन दिनों जिस तरह से लड़कियां अधिक उम्र में शादी करती हैं, इससे प्रेग्नेंसी प्लान करते करते भी उम्र में इजाफा हो जाता है। साथ ही जीवनशैली की समस्याओं में कुछ महिलाएं ऐसे समस्याओं से पीडि़त हो रही हैं जिनसे प्रेग्नेंसी में कठिनाइयां आने लगती है। अधिक उम्र में प्रेग्नेंसी की बात करें तो अंडाशय में अंडों की गुणवत्ता कमजोर पडऩे लगती है। साथ ही, अधिक उम्र के असर से दिक्कतें बढ़ती हैं।
प्री मेरिटल व कंसेप्शनल काउंसलिंग जरूरी
विशेषकर 29 वर्ष की उम्र के बाद गर्भधारण में समस्या आ सकती है। इसलिए कई विशेषज्ञ इनके लिए प्री मेरिटल व कंसेप्शनल काउंसलिंग करते हैं। इसके तहत उन्हें रोगों की फैमिली हिस्ट्री के अलावा डायबिटीज, हाइपरटेंशन, थायरॉइड, रेटिनाइटिस पिग्मेंटोसा, सिकल सेल एनीमिया, थैलेसीमिया जैसी उन रोगों की जानकारी देते हैं जिससे शिशु प्रभावित हो सकता है।
मापदंडों को करते हैं तय
इन दिनों ज्यादातर महिलाएं पीसीओएस से ग्रस्त हैं। इसका इलाज लेने के अलावा महिला को वजन संतुलित रखें, खून की कमी न हो इसपर ध्यान देने के अलावा फॉलिक एसिड युक्त चीजों को लेने की सलाह देते हैं।
जटिलताएं :
30 पार प्रेग्नेंसी को हाई रिस्क प्रेग्नेंसी भी कहते हैं। इस दौरान मल्टीपल प्रेग्नेंसी, जेस्टेशनल डायबिटीज व क्रोमोसोम संबंधी परेशानियों की आशंका बढ़ जाती है।
लें इलाज :
अधिक उम्र का प्रभाव शिशु पर न पड़े इसके लिए गर्भधारण से पूर्व कैल्शियम, विटामिन-डी, आयरन व फॉलिक एसिड डोज के अलावा 11-14 और 18-20 हफ्तों पर सोनोग्राफी कराने की सलाह देते हैं ताकि किसी समस्या का पता कर सकें।
एक्सपर्ट : डॉ. निर्मला शर्मा, प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ, गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, कोटा
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