Saturday, 17 August 2019

त्वचा में दिखाई दें ये बदलाव तो हो सकता है स्किन कैंसर

त्वचा की कोशिकाओं में असामान्य वृद्धि होना स्किन कैंसर हो सकता है। ये ज्यादातर उन हिस्सों में होता है जहां सूर्य की किरणें सीधी पड़ती हैं जैसे चेहरा, गला, हाथ और पैर आदि। ऐसी स्थिति में डीएनए डैमेज होने के कारण कोशिकाओं में असामान्य वृद्धि होने लगती है और स्किन कैंसर की स्थिति बनती है। इसके अलावा स्किन कैंसर के और भी कई कारण हैं जैसे रोग प्रतिरोधक क्षमता का कमजोर होना, रेडिएशन जैसे एक्स-रे का बार-बार होना, खानपान में प्रिजर्वेटिव्स यानी रसायनों का अधिक इस्तेमाल आदि।

तीन प्रकार का होता कैंसर -
स्किन कैंसर मुख्यत: तीन प्रकार का होता है-
1. सैक्वमस सेल कार्सिनोमा : यह स्किन कैंसर त्वचा की ऊपरी परत को प्रभावित करता है। इसके मामले उन लोगों में पाए जाते हैं जो धूप में अधिक समय बिताते हैं। इसमें चेहरा, गला, हाथ पैर प्रभावित होता है।
2. मेलानोमा : यह सबसे घातक होता है। स्किन कैंसर का यह प्रकार शरीर के ऐसे हिस्से में होता है जहां सूर्य की अल्ट्रा वॉयलेट किरणें आसानी से नहीं पहुंच पाती जैसे हथेली और तलवे।
3. बेसल सेल कॉर्सिनोमा : यह त्वचा की सबसे निकली परत में होता है। स्किन कैंसर में इसके मामले अधिक सामने आते हैं हालांकि ये कैंसर पूरे शरीर में नहीं फैलता है।

ऐसे पहचानें - त्वचा पर मौजूद तिल का तेजी से आकार बदलना, उसमें से खून आना, खुजली होना, त्वचा पर लाल या काले धब्बे या अल्सर होना इसके लक्षण हैं। अगर 6 हफ्तों तक दवा लेने के बाद भी इनमें सुधार न हो तो कैंसर रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें। इससे बचने के लिए शरीर को ढककर निकलें, सनस्क्रीन एसपीएफ-30 लगाएं व डाइट में फल अधिक लें।

ऐसे होगा इलाज -
एलोपैथी -
सबसे पहले 3-5 एमएम त्वचा का टुकड़ा लेकर स्किन बायोप्सी टैस्ट करते हैं। मेलानोमा दूसरे अंगों जैसे लीवर में फैलता है ऐसे में सोनोग्राफी व सीटी स्कैन करके पुष्टि की जाती है। शुरुआती स्टेज है तो सर्जरी से इलाज किया जाता है। अगर ये दूसरे अंगों तक फैल चुका है तो रेडियोथैरेपी व कीमोथैरेपी दी जाती है। दोबारा स्थिति न बने इसके लिए स्मोकिंग, अल्कोहल से दूर रहने और खानपान सुधारने की सलाह दी जाती है।

आयुर्वेद -
मौसमी फल और सब्जियों को अधिक से अधिक डाइट में शामिल करें इनमेंं एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं। डाइट में लौकी, बैगन और तुरई जरूर लें। आयुर्वेद में एलोवेरा, गिलोय, तुलसी और हल्दी का इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती हैं। ये कैंसर की स्थिति बनने से रोकते हैं। इसके अलावा ये कैंसर के ट्रीटमेंट के बाद होने वाले साइड इफैक्ट से भी बचाते हैं। साथ ही अधिक सोडा व कॉफी से परहेज करें।

होम्योपैथी -
त्वचा पर सीधे पड़ने वाली सूर्य की किरणों से बचाएं। स्किन कैंसर के ज्यादातर मामलों में त्वचा में जलन अधिक होती है ऐसे में रसटॉक्स दवा दी जाती है। वहीं ट्रीटमेंट के बाद होने वाले साइड इफैक्ट की स्थिति न बनें इसके लिए कैलेंड्यूला दवा दी जाती है। बचाव के तौर पर एक्सपर्ट अधिक केमिकल वाले प्रोडक्ट का इस्तेमाल न करने की सलाह देते हैं। साथ ही लाइफस्टाइल सुधारने को कहा जाता है।



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