लैक्टोज इंटॉलरेंस यानी दूध या दूध से बने उत्पाद में मौजूद लैक्टोज शुगर का न पचना। यह बीमारी दो तरह से हो सकती है। पहला आनुवांशिक और दूसरा शरीर में किसी बीमारी जैसे डायरिया, सीलिएक डिजीज आदि के कारण। ये समस्या ज्यादातर 14-15 वर्ष की उम्र के बच्चों में अधिक देखने को मिलती है।
लक्षण : शरीर में लैक्टोज न पचने से पेट में गैस बनना, मरोड़ होना, उल्टी होना, पेट में दर्द रहना या बार-बार दस्त होना इसके लक्षण हैं। इसे नजरअंदाज न करें।
कारण : यह रोग आंतों में बनने वाले एंजाइम लेक्टेज के न बनने से होता है। ऐसा अनुवांशिक तौर पर भी हो सकता है। इसके अलावा पेट से जुड़े रोग होने पर आंतों की लाइनिंग को नुकसान होने से भी लेक्टेज एंजाइम न बनने से यह रोग हो सकता है।
टैस्ट : कई बार लोगों में इस रोग को लेकर भ्रम की स्थिति रहती है। ऐसे में विशेषज्ञ इसकी पुष्टि करने के लिए 4-5 दिन दूध या दुग्ध उत्पाद न लेने की सलाह देते हैं। अगर इस दौरान इस रोग के लक्षण नहीं दिखाई देते हैं तो एक-दो बार मिल्क प्रोडक्ट लेने को कहा जाता है। इस दौरान दोबारा लक्षण दिखने पर इस रोग की पुष्टि हो जाती है।
ये जानेंं : नवजात में इसके मामले कम सामने आते हैं। जन्मजात मामलों में भी ज्यादातर लक्षण 12 वर्ष की उम्र के बाद दिखाई देते हैं।
ये ध्यान रखें -
स्थिति गंभीर होने पर तुरंत लैक्टोज युक्त चीजों को लेना बंद करें वरना अधिक दस्त के कारण कमजोरी होने से कुपोषण की स्थिति बन सकती है। स्थिति सामान्य होने पर डॉक्टरी सलाह से दूध या इससे जुड़े उत्पाद ले सकते हैं ताकि शरीर में कैल्शियम की पूर्ति हो सके।
लैक्टोज इंटॉलरेंस है तो डाइट का विशेष ध्यान रखें -
इससे रोगी को ऐसी डाइट दी जाती है जिसमें लेक्टोज की मात्रा काफी कम हो ताकि वह इसे आसानी से पचा सके। ऐसे में दूध और दुग्ध उत्पाद जैसे पनीर आदि को न लेने की सलाह दी जाती है। दूध व इससे जुड़े उत्पाद न लेने से शरीर में कैल्शियम की कमी पूरी करने के लिए हरी सब्जियां, पालक, पत्तागोभी, ब्रोकली, काजू, पिस्ता, सोया मिल्क और सोया टोफू ले सकते हैं।
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