मस्तिष्क और गर्दन का कैंसर केवल इन्हीं अंगों की कोशिकाओं से जुड़ा नहीं होता बल्कि इनसे जुड़े अंग भी इससे प्रभावित होते हैं। जैसे लेरिंग्स (वॉइस बॉक्स), होठ, नाक और लार ग्रंथियां आदि। दिमाग और गर्दन से जुड़े कैंसर के ज्यादातर मामले मुंह, नाक और गले से शुरू होते हैं। जानते हैं इसके लक्षण और इलाज के बारे में-
प्रमुख लक्षण -
लगातार गले में खराश, मुंह से बदबू आना, आवाज में बदलाव या खरखराहट होना, गले में सूजन, बिना दर्द के उभार या कोई गांठ, मुंह में सफेद या लाल निशान, लगातार नाक बंद रहना या परेशानी होना।
कारण -
तंबाकू चबाना और धूम्रपान करना 85 प्रतिशत मामलों को बढ़ाता है। शराब की लत इस कैंसर के अलावा सांस व भोजन नली को भी प्रभावित करती है। कुछ मामलों में ह्यूमन पेपिलोमा वायरस और हरपीस प्रजाति का ईब्सटन-बार वायरस भी इसके कारक बनते हैं।
जांच -
मेडिकल हिस्ट्री जानने और फिजिकल एग्जामिनेशन कर रोग की पहचान करते हैं। इसके बाद एंडोस्कोपी, लैब टैस्ट, रेडियोग्राफ, सीटी स्कैन, एमआरआई और पैट स्कैन जैसी जांचें की जाती हैं। सुनिश्चित करने के लिए टिश्यू का सैंपल लेकर जांच (बायोप्सी) की जाती है। कैंसर ट्यूमर की पहचान होने पर एक्स-रे, सीटी स्कैन व एनेस्थीसिया देकर रोग की स्टेज का पता लगाया जाता है।
इलाज -
उपचार में ऑन्कोलॉजिस्ट, रेडियोलॉजिस्ट के अलावा डेंटिस्ट और स्पीच थैरेपिस्ट भी मदद करते हैं। इलाज में आजकल कैंसर ट्यूमर के लिए कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट देने के अलावा स्पीच थैरेपी और खानेपीने में तकलीफ व दर्द दूर करने पर फोकस करते हैं। रोबोटिक सर्जरी खासतौर पर इस्तेमाल होने लगी है। इसके अलावा कीमोथैरेपी के तहत दवाएं देकर व रेडियोथैरेपी के अलावा सर्जरी कर ट्यूमर को निकालते हैं।
दिमाग व गले में कैंसर ट्यूमर का फैलाव यदि होता है तो लसिका ग्रंथि सबसे पहले प्रभावित होती है। रक्त के जरिए इस कैंसर के फैलने के मामले कम सामने आते हैं।
ध्यान रखें -
इलाज के बाद अक्सर बोलने में व खाने की चीजों को निगलने में दिक्कत होती है जिसके लिए स्पीच पैथोलॉजिस्ट से परामर्श की सलाह देते हैं। धूम्रपान, तंबाकू चबाने, शराब व तनाव लेने से मना करते हैं।
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