किसी भी वर्ग या उम्र के व्यक्ति को कभी भी किडनी का रोग हो सकता है। यदि व्यक्ति में इस अंग से जुड़े रोगों की फैमिली हिस्ट्री हो या बढ़ती उम्र, किडनी में लगातार संक्रमण, पेन किलर या अन्य कोई दवा लेने की आदत है तो किडनी रोगों की आशंका दोगुनी हो जाती है। जिसमें किडनी में पथरी, ट्यूमर या इसका फेल होना शामिल है।
खराब जीवनशैली व डाइट में गड़बड़ी, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, धूम्रपान, मोटापा, कोलेस्ट्रॉल का उच्च स्तर, 65 या इससे अधिक आयु, पुरुषों में प्रोस्टेट ग्लैंड का आकार बढ़ना गुर्दे के सामान्य कार्यों में दिक्कत बढ़ाता है।
रोग के प्रमुख लक्षण
अधिकतर लोगों में किडनी रोगों के लक्षण तब तक दिखाई नहीं देते जब तक कि उनका रोग एडवांस स्टेज तक नहीं पहुंच जाता। हालांकि किडनी से जुड़े रोगों के सामान्य लक्षण हैं- अधिक थकावट या कम ऊर्जावान महसूस करना, ध्यान केंद्रित करने में परेशानी, भूख कम लगना, पर्याप्त नींद न आना, मांसपेशियों में खिंचाव व ऐंठन, पैर व टखने में सूजन। त्वचा पर अकारण खुजली होना, रात में बार-बार यूरिन आना, सीने में दर्द, सांस फूलना, अनियंत्रित हाई ब्लड प्रेशर आदि।
ट्रांसप्लांट क्यों जरूरी
किडनी का मुख्य कार्य व्यर्थ पदार्थों को यूरीन में बदलकर शरीर से बाहर करना है। मुख्य कारणों से जब किडनी अपनी क्षमता खो देती है तो व्यर्थ पदार्थ शरीर से बाहर निकलने के बजाय एकत्र होने लगते हैं जो सेहत के लिए खतरा बनते हैं। इनसे होने वाले संक्रमण के कारण जब किडनी खराब या फेल जाती है तो किसी स्वस्थ व्यक्ति से किडनी लेकर मरीज में इसका प्रत्यारोपण करना आवश्यक हो जाता है। जिन लोगों की किडनी बिल्कुल काम नहीं कर रही है या बहुत कम काम कर रही है उन्हें किडनी ट्रांसप्लांट की सलाह देते हैं।
किडनी को स्वस्थ रखने के लिए जरूरी उपाय
जीवनशैली में कुछ बदलाव कर और संतुलित व पोष्टिक डाइट से किडनी को स्वस्थ रख सकते हैं। शारीरिक रूप से सक्रिय रहें, नियमित रूप से एक्सरसाइज करें। बिना डॉक्टरी सलाह के कोई दवा न लें। रक्त में शुगर के स्तर को नियंत्रित रखें। अतिरिक्त नमक खाने से बचें। वजन नियंत्रित रखें। धूम्रपान, तंबाकू और शराब से तौबा करें।
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