इन दिनों खानपान में जंकफूड की मात्रा बढ़ने से प्राकृतिक और पौष्टिक मौसमी सब्जी और फलों की मात्रा कम हो गई है। इस कारण कई लाइफस्टाइल रोग जन्म ले रहे हैं जैसे मोटापा, उच्च रक्तचाप आदि। इसलिए सब्जी व फल के रूप में शाकाहार लेकर स्वस्थ रहा जा सकता है।
आहार तामसिक और शकाहारी दो प्रकार के होते हैं। आयुर्वेद में शाकाहार प्रकृति से सीधे तौर पर मिलने वाला होता है जैसे फल, सब्जियां, बीज आदि। वहीं तामसिक अप्रत्यक्ष रूप से ग्रहण किया जाता है जो कई रोगों को जन्म देता है। शाकाहार तन और मन दोनों को स्वस्थ रखता है।
सब्जी व फलों में मौजूद फाइबर (रेशे) आंतों की गति सही रखकर कब्ज व अपच से बचाते हैं।
ध्यान रखें कि भोजन के तुरंत बाद फल नहीं खाने चाहिए। वर्ना आंतों की कार्यप्रणाली बिगड़ सकती है। भोजन को पेट से छोटी आंत फिर बड़ी आंत तक जाने में कम से कम 2-3 घंटे का समय लगता है। जबकि फल 20 मिनट में पच जाते हैं। इस कारण अन्न के बाधा बनने से फल का पाचन आंतों तक नहीं हो पाता और पेट में ही ये पचने लगते हैं। जिससे पेट और गले में जलन होने लगती है।
कब्ज से पाइल्स, फिशर जैसे रोगों की आशंका बढ़ती है। ऐसे में शाकाहार पेट साफ करता है।
पुराने पाइल्स की समस्या कैंसर का कारण बन सकती है। इसके लिए ताजे फल व सब्जियां खाते रहें ताकि पाइल्स के कारक कब्ज से बचा जा सके।
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