शरीर को सिर्फ बाहरी ही नहीं अंदरूनी तौर पर भी साफ रखना जरूरी है। इसके लिए डिटॉक्सीफिकेशन यानी शरीर से विषैले तत्त्वों को बाहर निकालकर कई रोगों से बचाया जा सकता है। जानें इसके बारे में -
क्या हो अवधि
विशेषज्ञों के मुताबिक हर तीन महीने में एक बार हफ्तेभर के लिए डिटॉक्स डाइट फॉलो करनी चाहिए। लेकिन कुछ मामलों में इसकी अवधि घट या बढ़ सकती है। जैसे आपका वजन अधिक है तो हफ्ते में एक-दो दिन, कोलेस्ट्रॉल बढ़ा हुआ है, मधुमेह या बीपी के मरीज हैं तो हर दो माह में हफ्तेभर बॉडी डिटॉक्स करें। या तनाव की समस्या है तो 15 दिन में एक बार डिटॉक्स करें। इसकी अवधि बिना एक्सपर्ट की सलाह के न बढ़ाएं क्योंकि विटामिन व मिनरल की ज्यादा कमी होने पर डिहाइड्रेशन की स्थिति बनती है।
बीमारियों से होता बचाव
डिटॉक्सीफिकेशन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को सुधारकर बॉडी की सफाई करता है। रक्तशुद्ध कर त्वचा को चमकदार बनाता है। ऊत्तकों को क्षति पहुंचाने वाले फ्री-रेडिक्ल्स बाहर निकालकर कैंसर व कई बीमारियों से बचाता है। साथ ही किडनी व लिवर की कार्यप्रणाली बेहतर होती है। इस दौरान पर्याप्त नींद लें, सकारात्मक सोच रखें और सुबह हरियाली के बीच वॉक करें।
कब है जरूरी :
अक्सर थकावट महसूस होना, शरीर में दर्द, पेट से जुड़े रोग, अधिक वजन, त्वचा सम्बंधी समस्या आदि होने पर डिटॉक्सीफिकेशन किया जा सकता है।
ऐसी हो डाइट
सबसे पहले कॉफी, शराब, सिगरेट, प्रिजर्वेटिव्स, शुगर, वसा व जंक फूड से दूरी बनाएं। ये विषैले पदार्थों का कार्य करते हैं। एक आदर्श डिटॉक्स डाइट में 60 प्रतिशत तरल व 40 प्रतिशत ठोस खाद्य पदार्थ होना जरूरी है। डाइट में फल (तरबूज, पपीता, खीरे आदि) का जूस, हरी पत्तेदार सब्जियां (ब्रॉकली, फूलगोभी, पत्तागोभी) लें। फलों में पपीता, अनानास और सब्जियों में प्याज जरूर लें क्योंकि इन्हें क्लीनिंग एजेंट माना जाता है। फायबर युक्त चीजें जैसे ब्राउन राइस, चुकंदर, विटामिन-सी युक्त फल लें। रोजाना चार लीटर पानी पीएं। नींबू पानी, नारियल पानी और छाछ ले सकते हैं।
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