स्टीम बाथ यानी भाप स्नान सेहत के लिए काफी फायदेमंद है यह शरीर काे तराेताजा रखने के साथ-साथ मानिसक स्वास्थ्य काे भी बेहतर बनाता है।स्टीमबाथ रोमछिद्रों को खोलकर विषैले पदार्थों व यूरिक एसिड आदि को शरीर से निकालकर मृत त्वचा हटाता है साथ ही वात व कफ रोग का कारगर इलाज करता है। आयुर्वेद में 'औषधीय वाष्प' कई रोगों के इलाज की प्रभावी विधि है। औषधीय वाष्प यानी पानी में कई तरह की औषधियोंं, तेल और पत्तियों को डालकर भाप लेना। जानें इनके फायदे-
कब कौनसा स्टीम बाथ लें
पत्तियां : इसके लिए गर्म पानी में खुशबूदार फूलों व पौधों की पत्तियां जैसे लेमनग्रास, तुलसी, लैवेंडर, रोजमेरी, चमेली, मोगरा, कमल, यूकेलिप्टस या पुदीना आदि डाल सकते हैं।
फायदा : इनकी खुशबू शरीर को ताजगी देने के साथ मानसिक सुकून (Mental Peace) पहुंचाती है। यह त्वचा की चमक बढ़ाने, बढ़ती उम्र का असर कम करने के साथ एग्जिमा, डर्मेटाइटिस व मुंहासों में फायदेमंद है।
मसाले : अजवाइन, दालचीनी, अदरक के छोटे-छोटे टुकड़े की भाप ले सकते हैं।
फायदा : सांस से जुड़े रोग, सिरदर्द, खांसी जुकाम व नाक के जाम होने में कारगर है।
क्वाथ : पानी में चिकित्सक की सलाह के अनुसार महारास्नादि, एरंडमूल और दशमूल क्वाथ डालकर भाप लें।
फायदा : आर्थराइटिस, स्पॉन्डिलाइटिस जैसे वात रोगों में होने वाले जोड़ों का दर्द, सूजन और जकडऩ में फायदा होता है।
तेल : पानी में पिपरमिंट, यूकेलिप्टस, लैवेंडर या कपूर के तेल की 10-15 बूंदें डालकर स्टीम लें।
फायदा : इसकी खुशबू व औषधीय प्रभाव सिरदर्द, तनाव, बेचैनी और अनिद्रा दूर कर दिमाग को तरोताजा रखती है। साथ ही सर्दी, खांसी, जुकाम, इंफ्लूएंजा, निमोनिया आदि को दूर कर सांसनली में मौजूद बैक्टीरिया नष्ट होते हैं। गले की खराश दूर कर फेफड़े से कफ बाहर निकालने के साथ सिरदर्द में राहत मिलती है।
ये ध्यान रखें
स्टीम से पहले : स्टीम के दौरान काफी पसीना निकलता है इसलिए इसे लेने से पहले 1-2 गिलास गुनगुना पानी पीएं। पत्तियां और तेल को पानी गर्म करने के बाद डालकर भाप लें।
स्टीम के दौरान : स्टीम न्यूनतम 15-20 मिनट और अधिकतम 30 मिनट ही लें। शरीर की प्रकृति गर्म है तो पानी में पिपरमिंट, चंदन, खसखस डालें व 15 मिनट ही भाप लें।
भापस्नान के बाद : ट्रीटमेंट के तुरंत बाद ठंडी जगह पर न जाएं और न ही ठंडी चीजें खाएं। इसके बाद एक बार गुनगुने पानी से नहाएं। नींबू व नमक का घोल पी सकते हैं।
5 फायदे
रक्तसंचार बढ़ता : रोमछिद्र खुलने के साथ शरीर में रक्त और पोषक तत्त्वों का संचार बेहतर होता है।
बैक्टीरिया-वायरस नष्ट होते : शरीर का तापमान तेजी से बढऩे के कारण रोग के बैक्टीरिया व वायरस नष्ट होते हैं।
इम्यूनिटी बढ़ती : शरीर की मांसपेशियां रिलैक्स होने के साथ विषैले तत्त्व बाहर निकलते हैं व रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
घटता वजन : पसीने के रूप में बॉडी से चर्बी घटने के कारण वजन घटने के साथ शरीर के अंग सक्रिय होते हैं।
मसल्स को आराम : वर्कआउट के बाद स्टीमबाथ लेने से मांसपेशियों को आराम मिलता है।मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) बेहतर बनता है।
स्टीमबाथ लेने जा रहे हैं तो यह जानना जरूरी है कि कब इसे न लें।
ये न लें : हृदय रोगी, गर्भवती महिला, बुखार, धमनियों मेें सूजन के रोगियों और बच्चों को स्टीम नहीं देनी चाहिए।
कैसे लें : पूरे शरीर को भाप देना सबसे अच्छा होता है। अगर शरीर के किसी खास हिस्से मेंं दिक्कत है जैसे जोड़ों का दर्द आदि है तो प्रभावित हिस्से को स्टीम दे सकते हैं।
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