ग्रीन-टी पीने से धमनियां स्वस्थ रहती हैं। टोक्यो की क्योटो यूनिवर्सिटी में हुए एक शोध के मुताबिक ग्रीन-टी में मौजूद पॉलीफेनॉल तत्त्व धमनियों को अधिक फैलने, क्षतिग्रस्त होने (एन्यूरिज्म) और उनमें सूजन आने से बचाता है। कई बार अत्यधिक फैलने के कारण ये फट जाती हैं। पॉलीफेनॉल तत्त्व धमनियों को लचीलापन प्रदान करता है। कई बार किडनी के निचले भाग की धमनी में सूजन आने से व्यक्ति की मौत भी हो सकती है।
ग्रीन-टी पीने के अन्य फायदे
- ग्रीन-टी वजन कम करने के लिए फायदेमंद होती है। इसमें मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट, मेटाबॉलिज्म को बढ़ाकर वजन कम करने में मदद करता है। इसमें मौजूद सक्रिय यौगिक, फैट बर्निंग हॉर्मोन को प्रभावित करते हैं।
- ग्रीन-टी, पेरियोडोंटल (एक प्रकार की मंसूड़ों की बीमारी) में वरदान है । ग्रीन-टी, बैक्टीरियल प्लाक (दांतों की मैल) को नियंत्रित कर दांतों को खराब होने से बचाती है। ग्रीन-टी में मौजूद पॉलीफेनोल्स, ग्लोक्सीलट्रांसफरेस (एक तरह का बैक्टीरिया, जो चीनी खाने से मुंह में पैदा होता है) का अंत करके प्लाक से लड़ता है।
- हरी चाय में फ्लोराइड भी होता है, जो दांतों को खराब होने से बचाता है।
- ग्रीन-टी से डायबिटीज का खतरा कम हो सकता है, क्योंकि इसमें मौजूद पॉलीफेनोल्स (polyphenols) शरीर में ग्लूकोज के स्तर को संतुलित करते हैं।
- ग्रीन-टी हानिकारक कोलेस्ट्रॉल, जिससे ह्रदय रोग होने की आशंका बढ़ती है, उसके स्तर को कम कर सकती है।
सावधानी
- खाली पेट कभी भी ग्रीन टी न पिएं।
- खाना खाने से एक या दो घंटे पहले ही ग्रीन टी पी लें।
- कुछ लोग ग्रीन टी में दूध और चीनी मिलाकर पीते हैं। ग्रीन टी में चीनी और दूध मिलाने से परहेज करें।
- ग्रीन टी को शहद के साथ मिलाकर पीना फायदेमंद रहेगा।
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