लार मुंह में बनने वाला एक तरल है जो एंटीसेप्टिक की तरह काम कर हमें कई रोगों से बचाता है। लार में मौजूद एंजाइम भोजन को पचाते हैं। यह दांतों के बीच फंसे भोजन को तोड़कर बैक्टीरिया से बचाती है। यह दांतों, जीभ व मुंह के कोमल ऊत्तकों को चिकनाई देकर सुरक्षा करती है। रोजाना सुबह बासी मुंह पानी पीने से लार पेट में जाकर रोगों से बचाएगी।
98 प्रतिशत मानव लार 98 प्रतिशत पानी से बनी है, जबकि इसके शेष 2 प्रतिशत भाग में एंजाइम, बलगम, इलेक्ट्रोलाइट और जीवाणुरोधी यौगिक जैसे तत्त्व मौजूद होते हैं।
लार से कई रोगों का इलाज
एक्जिमा में सुबह उठकर करीब 1 माह तक लार लगाने से फायदा होता है। इसके अलावा सोरायसिस में सुबह बासी मुंह की लार 6 माह से 1 वर्ष तक, जलने के निशान पर 1-2 माह व घाव पर 5-10 दिन तक लार लगाएं। हाथ-पैरों की अंगुलियों के बीच होने वाले फंगल इंफेक्शन पर इसे रोजाना लगाएं। आंख आने पर दो दिन तक व एलर्जी होने पर 2-3 माह तक आंखों में लार को काजल की तरह लगाएं। पेट की समस्या या कीड़े होने पर सुबह उठकर बासी मुंह पानी पीएं।
इन वजहों से मुंह में लार की कमी
धूम्रपान से लार के दूषित होने या तंबाकू, खैनी, पान व जर्दा खाने से बार-बार थूकने की आदत से मुंह सूखने लगता है जिससे यह खत्म हो जाती है। ऐसे में जरूरत से ज्यादा लार बाहर निकल जाती है। दवाओं या ड्रग आदि के प्रयोग से भी मुंह सूख जाता है और लार न के बराबर रह जाती है।
अधिक बनना यानी पेट के रोगों की आशंका
कैंसर व स्ट्रोक का पता लगाने व डीएनए मैपिंग आदि लार के माध्यम से की जाती है। इसका अधिक बनना पेट, लिवर और पेट के कीड़े होने का सकेंत होता है।
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