नई दिल्ली स्थित सीनियर कॉर्डियोलॉजिस्ट डॉ. के.के. अग्रवाल ने बताया कि डॉक्टर-मरीजों के बीच बढ़ती अविश्वास की खाई बढ़ रही है। डॉक्टर में सेवाभाव व मरीज में भरोसा कायम रहना दोनों के हित में है। मरीज, परिजनों को लगता है कि डॉक्टर जांचें व सर्जरी पैसा कमाने के लिए करते हैं। ऐसा नहीं है, डॉक्टर मरीज की बीमारी के बारे में सोचता है ताकि वह स्वस्थ होकर घर जाए।
बढ़ रही अविश्वास की खाई
मरीजों का डॉक्टरों पर विश्वास डगमगा रहा है। अक्सर मरीजों को शिकायत होती है कि डॉक्टर जेनरिक दवाओं की बजाय महंगी दवाएं लिखते हैं। मरीजों को सवालों के जवाब नहीं देते हैं। परामर्श के लिए भी मोटी फीस लेते हैं। वहीं, डॉक्टरों का कहना है कि मरीज बीमारी व इलाज के बारे में पूरी तरह समझे बिना ही डॉक्टरों को दोष देते हैं। वे इंटरनेट से आधी-अधूरी जानकारी के आधार पर डॉक्टर से तर्क करते हैं। डॉक्टर की यही कोशिश होती है कि ठीक होकर रोगी हंसते-मुस्कुराते हुए परिवार के साथ घर जाए। मरीज व डॉक्टरों का रिश्ता एक दूसरे के प्रति अच्छा व्यवहार से अटूट बना रह सकता है।
ऐसे सुधरेगा रिश्ता
उन्होंने कहा कि मरीज पूरे विश्वास के साथ इलाज के लिए डॉक्टर के पास जाता है। इसके लिए जरूरी है कि डॉक्टर भी मरीज व उनके परिजनों के विश्वास पर खरा उतरे। मरीजों का भरोसा ही डॉक्टर को नई ताकत देती है। कई जांचें बीमारी की स्थिति व अन्य संबंधित बीमारियों की पहचान के लिए कराई जाती हैं। यह मरीज के हित में होती हैं। निजी चिकित्सा व्यवसाय है, लेकिन मानवीय सेवा पहला लक्ष्य है।
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